मैं देखता हूँ,
चिड़ियों के पंखों में बहती हवा,
वृक्षों की शाखाओं में गूंजता संगीत,
तारों की झिलमिलाहट में नृत्य करता प्रकाश।
वे सुखी हैं,
पर मैं उनसे अधिक सुखी हूँ।
क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं हूँ,
मुझे अपनी उड़ान का भान है,
अपनी जड़ों की गहराई का ज्ञान है,
अपनी रोशनी का एहसास है।
मैं जागरूक हूँ,
मुझे अपने आँसुओं का अर्थ मालूम है,
अपनी हँसी की गूंज सुनाई देती है।
मुझे पता है, कि मैं देख रहा हूँ,
कि मैं महसूस कर रहा हूँ।
वृक्ष बस झूमता है,
पर मैं उसकी छाया में बैठकर सोच सकता हूँ।
चिड़िया बस गाती है,
पर मैं उसके गीत में छिपे भावों को समझ सकता हूँ।
तारे बस चमकते हैं,
पर मैं उनकी चमक में अपना प्रतिबिंब देख सकता हूँ।
मेरा सुख गहरा है,
क्योंकि मैं केवल जीता नहीं,
मैं जानता हूँ कि मैं जी रहा हूँ।
और यही चेतना,
मुझे चिड़ियों, वृक्षों और तारों से भी अधिक सुखी बनाती है।