अकेलेपन का उपहार



अकेलापन नहीं है तन्हाई,
यह तो है खुद से गहराई।
मन के अंधेरों में खोज का उजाला,
सपनों को सच करने का हवाला।

यह समय है रुकने का, सोचने का,
जीवन के रास्तों को मोड़ने का।
भीड़ से दूर, शांति के पास,
यही तो है आत्मा का असली निवास।

जो समझे इसे, वो पाता है राह,
खुद से मिलने का मिलता है चाह।
यह उपहार है, यह अवसर है महान,
बनाओ इसे अपने जीवन का विधान।

तो मत समझो इसे एकांत की सजा,
यह तो है खुद को नया गढ़ने का मजा।
अकेलेपन में छिपा है सृजन का गीत,
खुद को जानो, यही है जीवन की जीत।


स्वयं



जैसे ही मैंने खुद को चुना,
दुनिया ने भी मेरी ओर रुख किया।
जो दरवाज़े बंद थे, खुलने लगे,
जो रास्ते धुंधले थे, साफ़ दिखने लगे।

मैंने सोचा था, मुझे दूसरों को मनाना होगा,
पर सच तो यह था—
मुझे बस खुद को अपनाना था,
अपने होने को पूरी तरह स्वीकारना था।

जब मैंने अपनी राह चुनी,
हर कदम मेरा साथ देने लगा,
जैसे ब्रह्माण्ड ने मेरी प्रतिज्ञा सुन ली,
और कह दिया— "अब यह भी तेरा है।"

अब जो आए, वो मेरे रंग में घुल जाए,
जो रहे, वो मेरे सत्य को पहचान ले,
क्योंकि जब मैंने खुद को अपनाया,
पूरी सृष्टि ने मुझे अपना लिया।


आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...