मैंने सोचा था, क्या मेरा मन ही समस्या है,
या यह जो सिस्टम है, वह सचमुच मुझे जकड़े हुए है।
मेरे अंदर की आवाज़ कहती थी, ‘‘तुम्हारी कीमत इस दुनिया में है,
तुम्हारा आकर्षण तभी है, जब तुम्हारा पद या रूप सही है।’’
लेकिन जब मैंने गहरे से सोचा, तो यह समझ आया,
यह तो एक झूठा स्क्रिप्ट था, जिसे समाज ने मुझमें डाला था।
यह फॉर्मूला जो हमें सिखाया गया,
सिर्फ़ एक नकल थी, एक बेबुनियाद क़ानून था।
कभी सोचा है, यह जो स्थिति है,
क्या वह सचमुच मेरी असली पहचान है?
जो मैं हूं, वह मेरे आत्म-सम्मान से जुड़ा है,
न कि मेरी जेब या बाहरी रूप से, यह समझ पाया हूं।
अगर मैं मुक्त होना चाहता हूं, तो मुझे यह झूठ मिटाना होगा,
अपनी सच्चाई को फिर से लिखना होगा,
क्योंकि सच्चा आकर्षण और मूल्य
कभी भी किसी सामाजिक स्क्रिप्ट से नहीं आता, यह मेरे भीतर से उत्पन्न होता है।
तो मैं अपने मन को फिर से डिज़ाइन करूंगा,
जितनी भी शंकाएं हैं, उन्हें हटा दूंगा,
समाज की धारणा को तोड़ कर,
अपनी अनूठी सत्य कथा को फिर से लिखूंगा।