क्यों ठहरें? जीवन पुकार रहा है – हर पल को अपनाओ।


क्यों ठहरें, क्यों रुकें,
जीवन की ये पुकार सुनो,
हर पल में है सौगात कोई,
हर क्षण को अपना बना लो।

रंग भरे इन पलों में,
खुशियाँ हैं बसी हुईं,
हँसी का संगीत सुनो,
और पीड़ा को बहने दो।

जो बीत गया, वो सपना था,
जो आने वाला है, वो रहस्य है,
पर जो सामने है, यही सच है,
यही तुम्हारा अपना पल है।

मत रोक हँसी की वो गूँज,
मत रोको दिल की वो धड़कन,
आज की इस धारा में बहो,
जियो खुल कर, अपने संग चलो।

आसमान से गिरती ओस,
फूलों की महक, बयार का संगीत,
ये सब तुम्हारे हैं साथी,
हर पल में बसी है ये प्रीत।

जीवन का ये रंगमंच है,
हर पात्र में तुमसे बात करे,
हृदय से हृदय तक पहुँचती हैं ये भावनाएँ,
इस नाटक में तुम्हारा किरदार खेले।

तो आओ, जियो तुम भी यूँ,
जैसे आज ही आखिरी क्षण हो तुम्हारा,
मुस्कुराओ, झूमो, और गाओ,
हर पल को पूरी तरह से अपनाओ।

क्योंकि जीवन वहीं है, जहाँ तुम हो,
हर पल में आनंद का रस है,
मत ठहरो, मत थमो,
जीवन की हर सांस में प्रेम बसा है।


आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...