चक्र तोड़ने की राह


पहले समझा, उसकी तन्हाई को,
कि शायद किसी के साथ नहीं थी वो।
पर अब महसूस करता हूँ, सच कुछ और था,
उसकी एक राह थी, जो समाज की उम्मीदों से अलग था।

जहाँ हर कदम पर थे बंधन,
वह उन बंधनों से निकलने की कोशिश में थी।
समाज की धारा से हटकर चलने का जुनून,
उसके अकेलेपन का कारण वही था।

जो चक्र तोड़ता है, उसे हर मोड़ पर अकेलापन मिलता है,
क्योंकि वह बदलाव की दिशा में चलता है।
लेकिन वही राह, जो कठिन है,
वह उसे उसकी असली पहचान दिलाती है।

समझ अब आया, उसकी तन्हाई की असल वजह,
वह उन उम्मीदों के खिलाफ चल रही थी,
जो हर महिला पर थोप दी जाती हैं।
यह चक्र तोड़ने की राह थी,
जो अकेले ही तय करनी होती है।


आध्यात्मिक युद्ध: अपने भीतर की शक्ति को पहचानें

### आध्यात्मिक युद्ध: अपने भीतर की शक्ति को पहचानें

आज की दुनिया में, हम एक अदृश्य युद्ध का सामना कर रहे हैं। यह युद्ध शारीरिक या भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है। यह हमारे विचारों, भावनाओं और आत्मा पर होने वाला संघर्ष है। इस युद्ध में हमें खुद को पहचानने, अपने मूल्यों को समझने और अपनी आत्मा को सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

### आध्यात्मिक युद्ध का सामना

आध्यात्मिक युद्ध का सामना करने के लिए, हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि हमें अपने मन को शुद्ध और शांत रखना चाहिए। मुख्यधारा के मीडिया, टीवी, सिनेमा और संगीत हमारे अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ये हमारे विचारों को प्रभावित करते हैं और हमें एक विशेष ढांचे में ढालने का प्रयास करते हैं। यह आवश्यक है कि हम इनसे दूरी बनाएं और अपने मन को स्वतंत्र और शुद्ध रखें।

**श्लोक:**
"ततो यतयतः काञ्चित् मनः कृष्णे निवेशयेत्।
अन्यथा नायतेऽस्माकं चेतः सङ्कल्पवर्जितम्॥"  
(श्रीमद्भागवतम् 11.19.36)

अर्थात: मन को कृष्ण में केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि अन्यथा मन हमेशा विभिन्न इच्छाओं और संकल्पों में फंस जाता है।

### मीडिया और अवचेतन मन

मीडिया और मनोरंजन उद्योग हमारे अवचेतन मन को प्रोग्राम करने का काम करते हैं। यह जरूरी है कि हम अपने मन को इन प्रभावों से बचाएं और अपनी आत्मा की आवाज सुनें। हमें खुद को शुद्ध और स्वतंत्र रखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम अपने भीतर की शक्ति को पहचान सकें।

### प्रणाली से मुक्ति

आधुनिक प्रणाली हमें एक निश्चित तरीके से जीने के लिए मजबूर करती है। यह प्रणाली हमें मानसिक रूप से नियंत्रित करती है और हमारी स्वतंत्रता को सीमित करती है। इसे जितना हो सके, अपने जीवन से हटा देना ही हमें सच्ची स्वतंत्रता और आत्म-सशक्तिकरण की ओर ले जाएगा। हमें अपनी स्वयं की राह चुननी चाहिए और अपनी आत्मा की शक्ति को पहचानना चाहिए।

### उदाहरण: महात्मा गांधी

महात्मा गांधी का जीवन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी आत्मा की शक्ति से आध्यात्मिक युद्ध में विजय प्राप्त कर सकता है। गांधीजी ने हमेशा सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का प्रयास किया। उन्होंने मीडिया और आधुनिक प्रणाली से दूर रहकर, अपनी आत्मा की आवाज सुनी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि आत्मा की शक्ति से हम किसी भी युद्ध में विजय प्राप्त कर सकते हैं।

इस बात को एक कविता से समझते हैं ।

आध्यात्मिकता का युद्ध है, मन में मचता शोर।  
मीडिया की चकाचौंध से, खुद को रखना दूर।  

टीवी और सिनेमा से, मन को मुक्त कर लो।  
मुख्यधारा के संगीत से, अपने कानों को भर लो।  

प्रणाली की बेड़ियों से, खुद को कर लो मुक्त।  
आत्मा की आवाज सुनो, जीवन हो जाएगा युक्त।  

महात्मा गांधी की राह पर, चलो सच्चे दिल से।  
सत्य-अहिंसा का पथ अपनाओ, दिल से और मन से।  

### निष्कर्ष

इस आध्यात्मिक युद्ध में जीतने के लिए, हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानना होगा। हमें मीडिया और आधुनिक प्रणाली से दूर रहकर, अपने विचारों और भावनाओं को शुद्ध रखना होगा। महात्मा गांधी जैसे उदाहरण हमें दिखाते हैं कि आत्मा की शक्ति से हम किसी भी युद्ध में विजय प्राप्त कर सकते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची स्वतंत्रता और आत्म-सशक्तिकरण की ओर ले जाएगा।

आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...