अब मैं मैं हूँ



अब मैं मैं हूँ 
झुका नहीं, रुका नहीं,
अपनी सीमाएँ रेखांकित कर चुका हूँ,
अब मैं किसी का मोहर नहीं।

पहले हाँ थी मेरी भाषा,
अब ‘न’ का भी अधिकार लिया है,
जो चाहते थे सिर झुकाना मेरा,
उन्हें अब आईना दिया है।

कहते हैं— "तू बदल गया है,"
हाँ, मैं बदल चुका हूँ,
अब मैं बस मुस्कुराता हूँ,
पर हर दर्द नहीं सहूंगा।

अब न कोई फ़िज़ूल उम्मीद रखे,
न कोई मुझसे कुछ छीने,
मैं अपने मौलिक सत्य में खड़ा हूँ,
और इस सत्य को अब कोई नहीं जीते।




त्याग तपस्या की राह चली

त्याग तपस्या की राह चली, सपनों का था जहां बसा,
मेहनत की हर इक कड़ी, उम्मीदों का था जहाँ धरा।

मिले न वो फल तपस्या के, चाहा था जो मन में हमने,
फिर भी चलते रहे इस सफर, मंज़िल की ओर बढ़ते हमने।

छोड़ न पाया उम्मीदों को, चाहे जो भी हो रास्ता,
कभी तो चमकेगी किस्मत, संघर्ष का देख नतीजा।

आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...