छाया तो छाया है

छाया का उद्देश्य यही है सिखाना,
हरदम उजाला और खुशी में खोना नहीं।
अपने मूल्य को जानने के लिए,
हर समय प्रकाश में रहना जरूरी नहीं।

छाया तो छाया है, आत्मा का प्रकाश नहीं,
इसे अपनाने का अर्थ, स्वीकृति में गहराई।
अंधेरे का भी है अपना महत्व,
मन के हर कोने को रोशनी मिलनी चाहिए भाई।

स्वयं की छवि को अपनाना,
अंतरतम में झांकना जरूरी है।
छाया का अस्तित्व मानो,
स्वयं से प्रेम, यही असली पवित्रता है।

अंधकार को गले लगाओ,
इसमें छुपा है गहन सत्य।
अपनी छाया को पहचानो,
यही है आत्मा की वास्तविक स्थिति।

आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...