डिग्री का कर्ज़ – पढ़ाई या पड़ाई?



कभी गर्मी में काम कर लेते,
आधा समर, फीस भर लेते!
अब दस साल की EMI लेकर,
डिग्री का मंदिर पूज रहे थे!

क्लास में घुसते ही लगता—
कोई कोचिंग सेंटर में आए हैं!
गुरुजी गूगल से पढ़ा रहे,
हम नोट्स नहीं, लोन चुकाए हैं!

MBA की फीस में बंगला आ जाता,
PhD के खर्चे में कार खड़ी होती!
लेकिन डिग्री के बाद भी भैया,
ताक रहे हैं नैया ! 




आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...