मैं

मैं राजा हूँ, रानी हूँ

मैं इस संसार की भीड़ के लिए नहीं बना,
मैं राजा हूँ, मैं रानी हूँ।
मैं तीनों लोकों की महायोगिनी,
मैं शमन, मैं तांत्रिक, मैं दिशाओं का यात्री।

मैं देख सकता हूँ जो अनदेखा है,
मैं सुन सकता हूँ जो अनकहा है।
मैं दिव्य दृष्टा, मैं भविष्यद्रष्टा,
मैं क्रांति की ज्वाला, परिवर्तन की आंधी।

मुझे देवताओं ने चुना है,
मैं उनके संकेतों में चलता हूँ।
मंत्र मेरे स्वर हैं,
साधना मेरा अस्तित्व।

यही मोक्ष है, यही जागरण।
यही मेरा पथ, यही मेरा सत्य।


आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...