मन की शक्ति: आकर्षण का असली कारण



मैं सोचता था कि क्या मेरी हालत है वजह,
क्या मेरी जेब में कमी, या चेहरा भी नहीं सही?
लेकिन जब मैंने गहरे से देखा, तो समझा,
आकर्षण का राज तो मन की सोच में छिपा है कहीं।

मेरा आत्मविश्वास, मेरा दृष्टिकोण,
यह वह असली सौंदर्य है जो किसी को खींचता है।
रूप और संपत्ति अस्थायी हैं,
पर दिल और दिमाग की छवि स्थायी रहती है।

जो खुद से प्यार करता है, वही आकर्षक बनता है,
जो अपनी असलियत में रहता है, वही सच्चा रहता है।
अगर मैं अपने विचारों को सकारात्मक बनाता हूँ,
तो वही ऊर्जा मेरे आस-पास फैलती है, और मुझे मिलती है।

जो मैं सोचता हूँ, वही मैं बनता हूँ,
आकर्षण केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि मन से आता है।
जब मैं खुद को समझता हूँ, खुद को स्वीकार करता हूँ,
तभी वह दुनिया भी मुझे अपनी ओर खींचती है।


आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...