लड़ाई खुद से खुद की


सिद्धांत या नैतिकता, दोनों का सवाल,
मजबूर आदतें उठाती हैं बवाल।
फैसले जो उठते मजबूरियों से,
युद्ध करते हैं वे, दिल की गलियों से।

आदतें जो जकड़ी हैं मजबूती से,
लड़ाई में उलझती, अपनी ही धुन से।
नैतिकता का सवाल जब आता सामने,
मन में बवंडर, चुपचाप गहराने।

खुद से खुद की यह लड़ाई निरंतर,
सत्य और आदतें, करते आमना-सामना अक्सर।
मन के भीतर चलती यह जंग भयानक,
सिद्धांतों की आवाज़, आदतों का संघर्ष।

फैसले जो किए मजबूरी में कभी,
लड़ते रहते दिल में, रात दिन सभी।
जीत किसी की नहीं, बस संघर्ष है जारी,
खुद से खुद की यह लड़ाई, कभी न होती पराई।

मन की यह लड़ाई, चलती सतत,
सिद्धांतों के साथ, आदतें भी जटिल।
खुद को जानना, यही असली जीत है,
इस लड़ाई में जो खुद से खुद की है।

आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...