कई ओर भी हैं


गफ़लत के मारे कई ओर भी हैं
खुदा के सहारे कई ओर भी हैं

किस किस को देखे सोचे किसे अब
तुम्ही से हमारे कई ओर भी हैं

 नजर मैं चढ़े हो तो दिल को भी देखो
कसम से नजारे कई ओर भी हैं

जो दिल मांगा हमने तो बोले वो....
दीपक... तेरे जेसे आरे जारे कई ओर भी हैं

आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...