पहले समझा, उसकी तन्हाई को,
कि शायद किसी के साथ नहीं थी वो।
पर अब महसूस करता हूँ, सच कुछ और था,
उसकी एक राह थी, जो समाज की उम्मीदों से अलग था।
जहाँ हर कदम पर थे बंधन,
वह उन बंधनों से निकलने की कोशिश में थी।
समाज की धारा से हटकर चलने का जुनून,
उसके अकेलेपन का कारण वही था।
जो चक्र तोड़ता है, उसे हर मोड़ पर अकेलापन मिलता है,
क्योंकि वह बदलाव की दिशा में चलता है।
लेकिन वही राह, जो कठिन है,
वह उसे उसकी असली पहचान दिलाती है।
समझ अब आया, उसकी तन्हाई की असल वजह,
वह उन उम्मीदों के खिलाफ चल रही थी,
जो हर महिला पर थोप दी जाती हैं।
यह चक्र तोड़ने की राह थी,
जो अकेले ही तय करनी होती है।
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