सन्नाटे में जो आवाज़ गूंजती है,
जो तुम्हारे भीतर से उठती है।
वो कोई भ्रम नहीं, कोई संयोग नहीं,
वो है तुम्हारी आत्मा की सच्ची पुकार।
तुम्हारी अंतर्ज्ञान तुम्हारी राह है,
जो हर संशय को मिटा देती है।
दिमाग भले शोर मचाए,
पर दिल की गहराई सत्य सुनाती है।
जब निर्णय कठिन हो,
और रास्ते धुंधले लगें।
तब उस नन्ही रोशनी को देखो,
जो तुम्हारे भीतर ही जल रही है।
अंतर्ज्ञान वो विश्वास है,
जो ब्रह्मांड से जुड़ा है।
ये तुम्हें गलत रास्ते पर नहीं ले जाएगा,
क्योंकि ये तुम्हारे सच्चे आत्मा का आईना है।
जो भी चुनौती हो,
उस पर विश्वास करो।
तुम्हारा दिल जानता है,
कि तुम्हें कहाँ जाना है।
सुनो, उस मौन को जो बोलता है,
देखो, उस संकेत को जो छिपा नहीं।
अंतर्ज्ञान तुम्हारा सबसे बड़ा साथी है,
बस अपनी आत्मा से संवाद करो।
No comments:
Post a Comment
Thanks