त्याग तपस्या का दिया मैंने हर पल,

त्याग तपस्या का दिया मैंने हर पल,
फिर भी मिल न सका मंजिल का असल फल।

मेरे जज्बातों की बगिया में सूख गए फूल,
फिर भी उम्मीद का दीप जलता रहा धुल।

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