संपन्नता का मूल—स्वयं पर विश्वास



संपन्नता का बीज वहीं पनपता है,
जहां विश्वास की मिट्टी होती है।
स्वयं पर भरोसा,
सबसे पहली सीढ़ी है उस शिखर की,
जहां जीवन अपनी पूर्णता में खिलता है।

अगर तुम अपने आप पर यकीन नहीं करोगे,
तो कोई सपना आकार नहीं लेगा।
हर उपलब्धि, हर समृद्धि,
तुम्हारे भीतर के विश्वास से जन्म लेती है।

"आत्मविश्वासः शक्तिः।"
(आत्मविश्वास ही शक्ति है।)

जब तुम अपने भीतर की शक्ति को पहचानोगे,
तो सृष्टि भी तुम्हारा साथ देगी।
कठिनाइयां, अवसर बन जाएंगी।
अभाव, समृद्धि का द्वार खोल देगा।

तुम्हारी सोच,
तुम्हारी वास्तविकता का निर्माण करती है।
इसलिए अपने भीतर के संदेह को मिटाओ,
और उस विश्वास को जगह दो,
जो तुम्हें हर लक्ष्य तक पहुंचा सके।

संपन्नता बाहरी नहीं,
यह तुम्हारे आत्मा का विस्तार है।
और इसका आरंभ वहीं से होता है,
जहां तुम स्वयं को पूरी तरह अपनाते हो।


सब कुछ शुभ के लिए हो रहा है



डरो मत, जीवन की राहें उलझी हो सकती हैं,
पर हर मोड़ तुम्हारे भले के लिए है।
जो भी हो रहा है,
उसमें छिपा है एक गहरा उद्देश्य,
एक योजना जो तुम्हारी जीत के लिए बनी है।

कठिनाइयों का यह अंधेरा,
सिर्फ उजाले की पहचान करवाने आया है।
हर ठोकर, हर रुकावट,
तुम्हें और मजबूत बनाने के लिए है।

"सर्वं मंगलमंगल्यं, सर्वं श्रेयःकरं भवेत्।"
(सब कुछ मंगलमय है,
और सब कुछ कल्याणकारी ही होगा।)

तुम्हारा संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा।
यह वह आधार है,
जिस पर तुम्हारी सफलता खड़ी होगी।
और अंत में,
यह सब प्रशंसा में बदलेगा।

तुम्हारे हर आंसू का जवाब,
एक मुस्कान होगी।
तुम्हारी हर हार,
एक जीत में बदल जाएगी।
डरो मत,
जीवन तुम्हारे साथ है,
और अंत हमेशा प्रशंसा से भरा होगा।


पूर्णता का सत्य



जो कुछ मैं चाहता हूँ,
वह मेरी ओर बढ़ रहा है,
जैसे सूर्य की किरणें
अंधकार को चीरती हैं।
हर सपना, हर आकांक्षा,
अपने समय पर मेरी होगी।

लेकिन जो आवश्यक है,
वह तो पहले ही मेरे भीतर है।
शांति, साहस, और प्रेम,
ये सब मेरे ही अंश हैं।
मैं पूर्ण हूँ,
जैसे नदी अपने प्रवाह में।

"आत्मनस्तु कामाय सर्वं प्रियं भवति।"
(अपनी आत्मा की तृप्ति के लिए ही
सब कुछ प्रिय हो जाता है।)

मेरे भीतर शक्ति का स्रोत है,
जो किसी बाहरी परिस्थिति का मोहताज नहीं।
हर आवश्यकता का समाधान,
मेरी आत्मा की गहराई में छिपा है।

इस विश्वास के साथ,
मैं हर दिन बढ़ता हूँ।
जो चाहूँगा, उसे पा लूँगा।
जो पाऊँगा, उसका आदर करूंगा।
क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा सत्य यह है—
सब कुछ मेरे भीतर से ही शुरू होता है।


प्यार से बदल नहीं सकते उन्हें



तुम चाहे अपना सारा प्यार लुटा दो,
दिल का हर कोना खोल दो।
पर कुछ लोग,
वफादारी, इज्ज़त, और समर्पण को
कभी समझ नहीं पाते।

प्यार उनकी फितरत नहीं बदलता,
जिनके लिए ये शब्द
सिर्फ दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं।
तुम जितना भी दो,
जितना भी सहो,
अगर वो इन मूल्यों को नहीं मानते,
तो सब व्यर्थ है।

"प्रेम से नहीं बदलेगी वह आत्मा,
जो वफादारी का मूल्य न जाने।
जो इज्ज़त की भाषा न समझे,
उससे समर्पण की आशा क्या?"

तुम जितना झुकोगे,
उतना ही वो तोड़ते रहेंगे।
तुम जितना दोगे,
उतना ही वो लेते रहेंगे।
लेकिन कभी न लौटाएंगे
वो सम्मान,
जो हर रिश्ते का आधार है।

प्यार महान है,
पर वो चमत्कार नहीं करता।
अगर दिल में सच्चाई और मूल्य न हो,
तो कोई भी रिश्ता
सिर्फ बोझ बनकर रह जाता है।

इसलिए याद रखो,
प्यार का मतलब खुद को खोना नहीं,
बल्कि सही व्यक्ति को पाना है।
जो वफादार हो,
जो इज्ज़त देना जानता हो,
और जो तुम्हारे प्यार को
वैसा ही लौटाए, जैसा तुमने दिया।


पंख


बस फिर से उड़ने को तैयार है  पंख
जरा थम से गये थे पंख
जरा जम से गये थे पंख
आ रही है ठंडी ठंडी हवायें
जो की उडा रही है पंख
फिर से मचलने को तैयार है पंख
बस फिर से उड़ने को तैयार है  पंख
 
जरा भावनाओं के अंधेर मे फंस गये थे पंख
जरा मोह के आवेश मे  घस गये थे पंख
आ रही है रूहानी सी  गुनगुनी धुप
जो की सुखा रही है पंख
फिर से सम्भलने को तैयार है पंख
बस फिर से उड़ने को तैयार है  पंख

छोड़ देना ही बेहतर है



अगर तुम किसी ऐसे बंधन में हो,
जहां खुद को खो देना पड़े,
जहां हर कदम डर से भरा हो,
और हर शब्द तौल कर बोलना पड़े,
तो जान लो, यह समय है
उससे बाहर निकलने का।

ऐसे रिश्ते,
जो आत्मा को घुटन में डाल दें,
जहां हर बातचीत
एक नया घाव बन जाए।
वो तुम्हारे लिए नहीं हैं,
और ना किसी के लिए होने चाहिए।

मैंने ऐसे समय में बहुत कुछ सीखा,
पर हर सीख दर्द से भरी थी।
ऐसे अनुभव,
जो गहराई से झकझोरते हैं।
उनसे मजबूत तो बनते हैं,
पर वो चोटें आज भी याद हैं।

किसी को भी ऐसा रिश्ता
कभी नसीब न हो।
न दुश्मन को,
और न किसी अजनबी को।
यह वो चक्र है,
जो आत्मा को थका देता है।

अब जब मैं देखता हूँ पीछे,
तो समझ आता है,
मुझे छोड़ देना था,
बहुत पहले।
अब मैं वादा करता हूँ खुद से,
ऐसे किसी रिश्ते में
कभी वापस नहीं जाऊँगा।

रिश्ता वही जो आज़ाद करे,
जो समझे, सुन सके, और बढ़ने दे।
जहां डर का नामो-निशान न हो,
जहां प्यार अपने असली रूप में हो।
याद रखो,
छोड़ना कमजोरी नहीं,
बल्कि खुद को बचाने की ताकत है।


Eggshell Relationships



मैं उन रिश्तों से दूर रहता हूँ,
जहां हर कदम सोचकर रखना पड़े,
जहां हर शब्द नाप-तौल कर बोलना पड़े।
जहां खुद को व्यक्त करने की आज़ादी न हो,
जहां "मैं" होने की जगह न हो।

जहां सीधा सच बोलना,
एक युद्ध का न्योता बन जाए।
जहां सहजता खो जाती हो,
और हर पल सावधानी का आवरण ओढ़ना पड़े।

जहां प्यार का उत्तर देना,
तूफ़ान बुलाने जैसा हो।
जहां हर वार्ता बच्चों जैसी बन जाए,
और बड़ों की तरह संवाद
के लिए कोई स्थान न हो।

जहां सुना जाना,
केवल एक सपना हो।
और हर भावना,
नकारात्मक मोड़ ले ले।

ऐसे रिश्ते,
जैसे नाजुक अंडे के छिलके,
जिन पर चलना,
हर वक्त खतरा बन जाए।
मैं उन रिश्तों से बेहतर,
खुद को अकेला मानता हूँ।

क्योंकि रिश्ता वो है,
जहां सच्चाई को जगह मिले,
जहां स्वाभाविकता बह सके,
जहां सुनने और समझने का
संतुलन बना रहे।

जहां प्यार का उत्तर,
प्यार से दिया जाए।
जहां दो दिल,
वास्तव में एक हो सकें।
जहां शब्दों से ज्यादा,
समर्पण का संगीत गूंजे।

मैं ऐसे रिश्तों का पक्षधर हूँ,
जो मजबूत हों,
नाजुक नहीं।
जहां कदमों में डर नहीं,
बल्कि आत्मविश्वास हो।


समय और दूरी से परे



संबंध वो नहीं जो समय का मोहताज हो,
और ना ही वो जो दूरी का हिसाब रखे।
यह वो धागा है,
जो आत्माओं को बिना शर्त बांधता है।

जब पहली बार तुम्हारी आंखों में देखा,
समय थम-सा गया।
ना दिन था, ना रात,
बस एक शाश्वत क्षण था,
जो हमारी आत्माओं को जोड़ गया।

"न कालस्य गणना, न दूरी की सीमा,
जहां आत्मा मिले, वहीं सारा जीवन रीमा।"

समय की रेत से गुजरते हुए,
दूरी के पहाड़ लांघते हुए,
हमेशा महसूस हुआ,
तुम्हारा स्पर्श,
जैसे कोई अदृश्य शक्ति,
मुझे संभाल रही हो।

कभी कोई पत्र नहीं,
कभी कोई शब्द नहीं,
फिर भी संवाद गहराई में होता रहा।
जैसे हवा की सिहरन,
जो बिना देखे भी,
पत्तों को छू जाती है।

तुम और मैं,
दो शरीर, पर एक ही अस्तित्व।
दूरी हो या समय,
हमारे बीच कभी दीवार नहीं बन सके।
हमारा बंधन,
वह अनंत धारा है,
जो समय और स्थान से परे है।


पुराने साथी



तुम्हारा दिल और मेरा दिल,
जाने कितने युगों से,
मिलता रहा है, बिछड़ता रहा है,
फिर भी हर बार,
एक दूसरे को पहचान ही लेता है।

शायद पहली बार,
किसी वटवृक्ष की छांव तले,
हमने एक-दूसरे को देखा था।
तुम्हारी आंखों में जो स्नेह था,
वह मेरी आत्मा में गहराई तक उतर गया।

फिर किसी और जीवन में,
हमने साथ बहाई थीं,
किसी शांत नदी की धाराएं।
तुम्हारी हंसी उस समय,
जैसे जलतरंग बजा रही थी।

कभी हम फूलों के साथ खिले,
तो कभी पतझड़ के संग झरे।
पर हर बार,
तुम्हारा और मेरा मिलन,
एक अपरिभाषित संगीत रचता रहा।

"यदृच्छया च मत्स्वप्नेषु हृदयस्पर्शमागतम्।
सदैव पुनर्मे हृदये च प्रतिध्वनिः।"

हर जन्म में,
तुम्हारे हृदय की धड़कन,
मेरे हृदय के लिए परिचित रही।
हम दोनों जैसे,
किसी पुराने ग्रंथ के पन्ने,
जो समय के चक्र में अलग हुए,
पर फिर जुड़ गए।

आज जब तुम्हें देखता हूं,
तो एक गहरी शांति छा जाती है।
जैसे युगों का सफर थम गया हो।
तुम्हारा और मेरा दिल,
सिर्फ दिल नहीं,
दो आत्माओं का अनादि प्रेम है।

तुम्हारे साथ,
हर बार लगता है,
यह आखिरी मिलन नहीं,
बल्कि हर जन्म का पहला।


मन का संगीत



तुम्हारी बनाई कला मन का रूप बदलती है,
तुम्हारी ली गई सांसें जीवन को संवारती हैं।
चोटों पर रखे मरहम से नयी राहें निकलती हैं,
सजाई गई नींद से आत्मा मुस्कुराती है।

दया का दीप जलाओ तो अंधेरा मिटता है,
तनाव की गांठ खोलो तो मन हल्का होता है।
दिनचर्या का सुर संगत बनाओ,
आदतों से जीवन का संगीत सजाओ।

जो सोच को नया नजरिया दो, वो प्रकाश फैलाती है,
जो सीमाओं को स्वीकारो, वो बंधनों को तोड़ जाती है।
थोड़ी स्थिरता लाओ, थोड़ी शांति को गले लगाओ,
अपने भीतर की कहानियों से नए सपने जगाओ।

कृतज्ञता के भाव से जीवन महकता है,
धरती से जुड़ाव से जड़ें गहरी बनती हैं।
रिश्तों को संजोने से प्रेम का वृक्ष फलता है,
हर गति, हर ठहराव, जीवन को पूर्ण बनाता है।

प्रकृति की गोद में समय बिताओ,
आराम में खुद को फिर से पाओ।
जो प्रेम बिखेरो, वो दिलों को जोड़ता है,
जो प्रकाश चुनो, वो अंधेरों को तोड़ता है।

हर लम्हा, हर प्रयास,
तुम्हारे मन का संगीत रचता है।


आधी-अधूरी आरज़ू

मैं दिखती हूँ, तू देखता है, तेरी प्यास ही मेरे श्रृंगार की राह बनती है। मैं संवरती हूँ, तू तड़पता है, तेरी तृष्णा ही मेरी पहचान गढ़ती है। मै...