स्वर्ण अनुपात और फिबोनाची अनुक्रम का परिचय
क्या तुम जानते हो
क्या तुम उसकी और अग्रसर हो
ये दुनिया नीली नीली सी दिखाई देती है
क्या तुम कभी अपने
शीशमहल से बाहर तुम आते हो
हो जाये जब सपना चकनाचूर
क्या टूटे कांचों को
जोड़ना तुम जानते हो
हमसे भी बेहतर है कोई
अपने से कमतर क्यों किसी को आंकते हो ।
तुमसे भी बेहतर दुनिया बना सकता है कोई
क्या ये बात मानते हो ।
"मैं बदलता हूँ, क्योंकि कई चीज़ें मुझे बदल देती हैं"
बहुत कुछ बदल गया
सतत रूप से परवाह न करना
साफ़ अंतःकरण का अर्थ
स्पष्ट अंतरात्मा का सत्य
एकाकी मन का संगम
हर पल एक अड़चन है
हर पल एक अड़चन है
आज अपनी राह में अड़चन है।
कल शायद राह नही न हो
फिर भी चलने का ख़्वाब रखते हैं हम।
अड़चन तो सदा रहेगी पर क्या
अड़चन से लड़ने के लिए तैयार हैं हम।
ख्याली दुनिया जो बसायी
उसी के लिए इतने बेकरार हैं हम।
अड़चनों का धुआं मन में फैला रहा है भ्रम
भ्रम में जी कर इस पल को भूल रहे हैं हम ।
ये पल ही वो पल है जिससे हर पल की
अड़चन को दूर कर सकते हैं हम ।
हर पल एक अड़चन है, हर अड़चन एक पल है
जिसका घूंट हर पल पी रहे हैं हम
ये पल हर पल है,हर पल जीना ही जीवन है
तो क्या हर पल जीवन जी रहे हैं हम ।
दीपक डोभाल
संख्या और पृथ्वी का अद्भुत सच
कभी तो हम साथ होंगे
प्यार भरी नजरों से ढूंडती हो जो तुम मुझे।
पर अब कहाँ मिलूंगा मैं तुझे ।
मैं तो खुद में खोया हुआ था
पाया है जब से खुद को खुद से
भूल गया हूँ मैं खुद तब से ।
वो बात अब जमाने की लगती है।
जिस जमाने हम बात किया करते थे।
एक तरफ तुम एक तरफ मैं
बस युहीं दो राहों पर खड़ी है दो जिंदगी
जो ना कभी मिलती है ना कभी बिछड़ती है।
बस टक टकी लगाए देखी जाती है एक दूसरे को।
इस इंतजार में की कभी तो हम साथ होंगे ।
दीपक डोभाल
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I was born in the serene town of Ganehspur nestled in the mountains of Uttarkashi, Uttarakhand . My earliest memories are filled with the e...
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