घोस्टिंग का राजा



हाँ, मैं हूँ घोस्टिंग का महाराजा,
ना कोई अलविदा, ना कोई सजा।
बस चुप, बिना कोई इशारा किए,
ख़ामोशी से बढ़ जाता हूं, बिना कुछ कहे।

कुछ लोग कह सकते हैं ये हैरान करने वाला,
पर मैं तो कहता हूँ, ये है दिल से सच्चा।
अगर तुमने कुछ गलत किया, या मेरा मूड नहीं है,
तो बस थोड़ी दूरी बनाए रखना, यही सबसे अच्छा है।

नहीं चाहता किसी का दिल दुखाना,
मगर इशारे से समझ जाओ, ये मेरा तरीका है जीने का।
मुझे लगता है कि, हां, यही है सही रास्ता,
दूसरे को टेंशन से बचाना, और खुद को भी रखना सस्ता।

तो, हां, मैं घोस्टिंग में महारत रखता हूं,
लेकिन दिल से किसी को भी चोट नहीं पहुंचाता हूं।
बस थोड़ा सा स्पेस, और थोड़ा सा शांति,
यह मेरा तरीका है, हर रिश्ते में ज़्यादा लाती है हंसी! 😂


भूतिया बादशाह



"मैं हूँ ghosting का किंग,"
इसीमें है मेरी सच्ची चीज़ी ताज की रिंग!
कभी जवाब नहीं, कभी न कोई कॉल,
बस इधर-उधर होते हुए, मैं बन जाता हूँ एक डूबता हुआ झील का जल।

कुछ लोग सोचते हैं, "ये तो अजीब है,
कहाँ गायब हो गए, जैसे भूतिया डेर।"
पर यार, सच बताऊँ, तो मैं न चाहता कोई मनमुटाव,
मैं नहीं चाहता किसी के दिल को देना कोई तकरार का जवाब।

"तुम समझ जाओ, hint है बिलकुल साफ़,
बिना चोट पहुँचाए, मैं हो जाऊँ लापता, जैसे हवा का झोंका साफ।"
कभी न चाहता किसी का दिल टूटे,
पर, मेरी चुप्पी में बस यही है सच्ची सुकून की धुंध।

तो समझो, ये ghosting भी एक कला है,
जो दिल को न दुखाए, बस खुद को सुकून का रास्ता ढूँढे।


इनकार

इनकार, इनकार, इनकार — यही है उनका नियम,
सच को झूठ में बदलना, यही उनका धरम।
सामने की हकीकत भी, वे न मानेंगे,
हर सच्चाई को, अपनी चाल में छिपाएंगे।

कैमरे की नजरों में भी पकड़े जाते हैं,
पर फिर भी झूठ का सहारा लेते हैं।
जो किया नहीं, वही कहते हैं,
और जो किया है, उसे झुठलाते हैं।

मैंने जब सच को पहचाना,
तो उनके लिए दुश्मन बन जाना था ठिकाना।
सच की रोशनी से डरते हैं ये,
झूठ की छाया में जीते हैं ये।

मुझे अब समझ आया,
इनसे लड़ने का मतलब अपना वक्त गंवाना।
सच बोलकर भी, वे नहीं सुनेंगे,
अपने झूठ की दीवारों में ही बंधे रहेंगे।

इसलिए मैं अब बस दूर हो जाता हूं,
उनकी दुनिया से खुद को बचाता हूं।
क्योंकि उनके इनकार में सच्चाई नहीं,
और मेरी शांति का मोल झूठ से सस्ता नहीं।


इंट्रोवर्ट की शांति और उनकी चुप्पी



इंट्रोवर्ट सबसे अच्छे इंसान होते हैं,
जो नफरत नहीं, न कोई द्वार खोलते हैं।
ना किसी से बदला, ना कोई शिकायत,
बस शांति से जीते हैं, और यही है उनकी सच्ची शक्ति की बात।

लेकिन, अगर तुम उन्हें लगातार पकड़ने की कोशिश करो,
चाहे कितनी भी बार वो दूर भागने को करो,
तो याद रखना, चुप्पी का मतलब ये नहीं कि उनका दिल नहीं दुखता,
वो सिर्फ खुद से लड़ते हैं, बिना आवाज उठाए, बस एक खामोशी में बहते हैं।

चुपचाप सहते हैं, पर हर सहमति की एक सीमा होती है,
कभी न कभी, उनका गुस्सा उबाल सकता है, ये समझो।
उनकी चुप्पी में छिपी हो सकती है एक ज्वाला,
जो देर से फूटे, तो झुलसा दे हर तल्ख़ी और ग़ुस्से की गहरी खाई।

तो, अगर तुम चाहते हो उनके साथ शांति बनी रहे,
तो उनकी दूरी का सम्मान करो, उनकी चुप्पी को समझो,
क्योंकि इंट्रोवर्टs अपनी शांति में रहते हैं,
पर जब उनका गुस्सा फूटता है, तो वो आग बनकर जलते हैं।


इंट्रोवर्ट की सादगी



इंट्रोवर्ट का मन है सरल और सच्चा,
न कोई उलझन, न कोई दिखावा, बस यही उनकी रचना।
वे शब्दों में खोने की बजाय, चुप रहना पसंद करते हैं,
जिन्हें वो समझते हैं, वही लोग अपने होते हैं।

जब तुम उन्हें गलत समझोगे या चोट पहुँचाओगे,
वो तुम्हारी दोस्ती से खामोशी से बाहर निकल जाएंगे।
कोई हंगामा नहीं, कोई तकरार नहीं,
बस चुपचाप रुकेंगे और फिर अपनी राह पर बढ़ जाएंगे।

वे न तुम्हें तंग करेंगे, न किसी से बदला लेंगे,
बस धीरे से उस रिश्ते से बाहर निकल जाएंगे।
जीवन में शांति की तलाश में,
न कोई तनाव, न कोई आहत, बस खुद से जुड़ेंगे।

उनकी सादगी में ही उनकी शक्ति छुपी है,
इंतजार नहीं, बस चलते जाना उनका तरीका है।
जब वो तुम्हें छोड़ते हैं, तो ये कोई चिल्लाहट नहीं,
बस चुपचाप, बिना किसी शब्द के, ख़ामोशी से बिछड़ना है।


इंट्रोवर्ट का खामोश दर्द



अगर तुमने दिल दुखाया, तो वो इंट्रोवर्ट,
तुमसे बदला नहीं लेंगे, बस धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे।
देखे हुए संदेश, बिना जवाब के कॉल्स,
योजनाओं में कमी, वो अपनी राह ले लेंगे।

न कोई जंग, न कोई तकरार,
सिर्फ शांति चाहिए, बिना कोई द्वार।
कभी-कभी, चुप्पी ही सबसे बड़ी बात होती है,
वो कभी नहीं चाहते तुम्हें तकलीफ देना, वो बस खुद से बढ़ते जाते हैं।

ये उनका तरीका है, दूर जाने का,
जैसे तैरते हुए, हल्के-हल्के बादल खो जाने का।
बिना किसी हंगामे, बिना कोई शोर,
बस शांति की तलाश, यही है उनका मंजिल का और।

वो धीरे-धीरे गुम हो जाते हैं,
खामोशी से अपना रास्ता अपनाते हैं।
क्योंकि जो दिल में जज़्बात होते हैं,
उन्हें शब्दों में नहीं, एकांत में शांति से जीते हैं।


हम स्टारस्टफ से बने हैं!



हमारी डीएनए में नाइट्रोजन,
हमारी हड्डियों में कैल्शियम,
हमारी खून में आयरन,
और हमारी पाई में कार्बन!

यह सब क्या है?
यह सब बना है तारों की रेस में,
जिन्होंने अपने अंदर हुए धमाके से,
हमारी सृष्टि को दिया था ये खूबसूरत ताना-बाना।

जो सितारे कभी टूटे थे आसमान में,
वही तत्व अब हममें समाए हैं इस धरती में।
हर बीट, हर सांस, हर सेल में,
हमारे अंदर भी गूंजते हैं वो तारे!

जरा सोचो, हम तो तारों से बने हैं,
हमारी हर कहानी, हर सपना वही तो जनमे हैं।
हम स्टारस्टफ से बने हैं, प्यारे,
तो उठो, चमको, और खुद को जरा याद दिलाओ कि तुम भी एक सितारा हो, बेधड़क, तैयार! 🌟


एक अच्छी स्त्री का प्रभाव



एक अच्छी स्त्री, जैसे सवेरा,
अंधेरे में रौशनी का बसेरा।
वो खोलती है नज़रों से पर्दे,
दिखाती है सच, जो था छुपा हर कोने।

उसका प्रेम नहीं बस आकर्षण,
वो सिखाती है जीवन का अर्थ, उसका सृजन।
हर बिखरे सपने को जोड़कर,
वो देती है नए रास्तों का पथ।

उसकी बातों में होती है सच्चाई,
उसके कर्मों में छुपी होती है गहराई।
वो सिखाती है धैर्य और समझदारी,
और हर मुश्किल को पार करने की तैयारी।

एक अच्छी स्त्री,
पुरुष को बेहतर इंसान बनाती है।
न सिर्फ़ प्रेम में,
बल्कि उसकी आत्मा को भी सजाती है।

वो उसकी शक्ति है, उसका आधार,
उसके जीवन का अनमोल उपहार।
जो समझे इस संबंध का सार,
वो पाता है जीवन में सही मार्ग।


धूप की तरह


तुझे पा लिया धूप की तरह
मगर धूप की तरह ही तू
सुबह कुछ देर ताजगी का एहसास देती है
और फिर दिन की गर्मी की तरह जलाती है

मैं जलता रहता हूँ तेरी खिलखिलाती धुप में
छांव भी नसीब नहीं
मगर तेरी जुल्फ जब मैं  ओढ़ लेता हूँ
 चेहरे पर वो मुझे शाम का एहसास देती है

जब तक ये एहसास जीता हूँ
तब तक तू शाम की तरह कहीं अँधेरे में खो जाती है
मैं ढूंढता फिरता रहता हूँ तुझे अँधेरे में
मगर ना जाने कहाँ तू खो जाती है

हर दिन धुप की तरह तू आती है
और रात की तरह चली जाती है
और मैं हर  पल तेरे लिए
जलता भी हूँ  बुझता भी हूँ 

ब्रह्मांड का शिक्षक



ज्ञान न पुस्तक में छुपा, न शास्त्रों के पन्नों में,
यह तो मौन का दीप है, स्व-अंतर के अन्नों में।
सत्य के स्वर लहराते हैं, आत्मा की गहराई में,
ब्रह्मांड करता मार्गदर्शन, हर जीव की परछाई में।

सूर्य की किरणें सिखातीं, तप और समर्पण का सार,
चंद्रमा की शीतलता कहती, शांत रहो, यही आधार।
वृक्षों की नीरवता बोलती, धैर्य का गूढ़ संदेश,
पर्वतों का अडिग खड़ा रहना, देता दृढ़ता का उपदेश।

सर्वं खल्विदं ब्रह्म का मंत्र, हर पल गुंजित है,
जो देखे उसे एक दृष्टि से, वही तो विजित है।
जीवन के सुख-दुख दोनों, शिक्षक रूप में आते हैं,
प्रेम और करुणा के पाठ, हर अनुभव सिखाते हैं।

मौन साधना से निकलेगा, अद्वितीय वह ज्ञान,
जो शब्दों से परे है, पर करता है हर सीमा का भान।
आओ इस पावन दिन पर, यह सत्य स्वीकारें,
कि ब्रह्मांड हमारा गुरु है, और सब अनुभव हमारे।

ज्ञानं चैतन्यमेव च, यही आत्मा का स्वरूप,
इस दिव्यता का अनुभव ही, है मुक्ति का आरूप।


काले युवा संस्कृति का अभाव



आज की पत्रिकाओं और मंचों में,
कहीं खो गया है काले युवाओं का सच।
न तो उनके संघर्षों की गूँज है,
न उनके सपनों का कोई अंश।

उनकी ऊर्जा, उनका रिदम, उनकी चाल,
सबकुछ अनदेखा, जैसे कोई भूला सवाल।
उनके अंदाज़, उनकी रचनात्मकता का कोई मूल्यांकन नहीं,
बस सतही चर्चाओं का सिलसिला है वहीं।

कहाँ है वो मंच जो उनकी पहचान को उजागर करे?
जो उनकी कहानियों को दुनिया के सामने रखे?
न तो कोई जमीनी खोज, न कोई गहराई,
सिर्फ खोखली बातें और चमकती परछाई।

ज़रूरत है उनके जीवन में झाँकने की,
उनके संगीत, उनके नृत्य, उनके शब्दों को समझने की।
उनके संघर्षों और विजयों का दस्तावेज़ बनाना होगा,
उनकी संस्कृति का सही सम्मान अब जताना होगा।

काले युवाओं की कहानी सिर्फ उनकी नहीं,
ये हमारी भी पहचान है, हमारी भी ज़मीन।
तो क्यों न मिलकर एक नया अध्याय लिखें,
जहाँ हर युवा का सपना साकार दिखे।


काला सिनेमा: नई लहर की तलाश



आज हम ऐसे दौर में हैं जहाँ सृजन की संभावनाएँ अनंत हैं,
फिर भी, काले सिनेमा और मीडिया में दिखती है एक चुप्पी—एक खालीपन।
वो गहराई, वो पेशेवर अंदाज़,
जो कभी धर्मयुग या साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसे मंचों की पहचान थे, अब जैसे खो से गए हैं।

इतने सारे उभरते हुए रचनाकार,
हर एक के पास कहने को कुछ ख़ास।
वो जुनून, वो आवाज़, वो विचार,
जो नए युग के प्रेरणा स्तंभ बन सकते हैं, कला के सितारे।

तो क्यों नहीं कोई नया मंच,
जहाँ संस्कृति और कला का हो अद्भुत संगम?
जहाँ हर कहानी को मिले सही सम्मान,
और हर आवाज़ को मिले अपनी पहचान।

ज़रूरत है फिर से उस ऊर्जा को जगाने की,
उन कहानियों को सुनाने की,
जो गहराई में उतरती हैं,
जो विचारों को बदलती हैं।

हमारे पास साधन हैं, तकनीक है,
बस चाहिए वो जुनून,
जो इसे नई ऊँचाइयों तक ले जाए,
और हर रंग को उसकी असली पहचान दिलाए।

क्योंकि सिनेमा और साहित्य की यह धारा,
सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक क्रांति का इशारा।


नया सवेरा


जब जीवन में आए नया सवेरा,
मैं सोचूं नई शुरुआत की डेरा।
कभी नहीं होता देर, नया आगाज़,
मैं अपनी किस्मत का करूँ फिर से साज़।

जब पुरानी बातें हो जाएं भूल,
मैं नए सपनों को दूँ जगह कुल।
हर पल हो सकता है नया सफर,
मैं अपने मन को करूँ फिर से तर।

जब राहें मुड़ें और रास्ते बदलें,
मैं अपनी हिम्मत को नई ऊंचाई दे डालूँ।
कभी नहीं होती देर, नया आरंभ,
मैं अपने जीवन को फिर से संभालूँ।

दोस्ती का संगम



अगर कभी तुमने दोस्ती के किनारे न मिलाए,
तो वो जादू कभी नहीं देखा होगा, जो दिलों को लुभाए।
जहाँ बातें हों अलग-अलग रास्तों से आईं,
और मुस्कानें बन जाएँ सबकी परछाईं।

रिश्तों को बांधने का ये जोख़िम जरूरी है,
क्योंकि प्यार का रंग तब ही पूरा है।
जब दोस्त तुम्हारे एकसाथ हँसे-गाएँ,
और पुरानी यादें नई कहानियाँ बन जाएँ।

सोचो, वो पल जब रसोई में तुम अकेले,
और हॉल में हर कोना चहके, मेले जैसे।
किसी का ठहाका, तो किसी की कहानियाँ,
और तुम बस अपनी खुशी के प्याले में हो।

ज़िंदगी के ये पल अनमोल होते हैं,
जो दोस्ती के संगम से संजोए जाते हैं।
तो डर छोड़ो, दरवाज़े खोल दो,
अपने दिल और घर को सबके लिए खोल दो।

क्योंकि जब दिल मिले, तो जश्न का शोर होता है,
और हर घूँट में ज़िंदगी का स्वाद होता है।


हाँ, मैं एक पेशेवर लेखक हूँ


कारपोरेट की दौड़ में, जहाँ हर कोई भाग रहा है,
वहीं मैं शब्दों के संसार में अपना वक्त लगा रहा हूँ।
9 से 5 की नौकरी, एक रोज़गार की डोर,
पर अंदर पलती है कहानियों की कोर।

कागज़ नहीं, मन के परदे पर लिखता हूँ,
मीटिंग के बीच, किरदारों को जीता हूँ।
मुझे देखा जाए तो मैं एक साधारण कामगार हूँ,
पर मेरी लेखनी से सजी कहानियाँ, ये सब जानकार हूँ।

हां, घड़ी की सुइयों से चलता हूँ,
पर अपने सपनों के पीछे हरदम पलता हूँ।
पैसे कमाने का जरिया ये नौकरी सही,
पर मेरी रूह की तस्कीन, मेरी कहानियाँ ही।

लोग पूछते हैं, "क्या ये सही है?"
मैं कहता हूँ, "शब्द मेरी आज़ादी हैं।"
मैं वो फिल्मकार हूँ, जो हर किरदार को जीता है,
नौकरी की दुनिया में भी अपनी कला को सींचता है।

तो हाँ, मैं एक पेशेवर लेखक हूँ,
अपने काम और सपनों के बीच एक पुल बुनता हूँ।
एक दिन ये कहानियाँ परदे पर उतरेंगी,
और तब मेरी मेहनत की आवाज़ सब तक पहुँचेंगी।


जीवन की यात्रा


यह सच है, जीवन एक खुली किताब है,
जहाँ तुम पाठक नहीं, लेखक हो,
कभी चित्रकार, कभी आलोचक।
हर पन्ने पर तुम अपनी कहानी लिखते हो,
हर मोड़ पर अपनी दिशा तय करते हो।

तुम्हारी कल्पना है जो आसमान को रंगती है,
या कभी उसे निर्विकार छोड़ देती है।
यह तुम्हारी इच्छा है,
कि हर क्षण को कैसे जीना है।

कभी तुम संघर्षों को चुनते हो,
कभी शांतियों में खो जाते हो।
यह तुम्हारा चुनाव है,
तुम क्या चाहते हो, वही हो जाता है।

कोई बंधन नहीं, कोई मजबूरी नहीं,
सब कुछ तुम्हारे हाथ में है।
लेकिन सबसे बड़ी बात,
तुमने जो किया, वही तुम्हारा चुनाव था।

इस यात्रा में तुम खुद के लेखक हो,
तुम्हारे हर कदम में एक नई कथा है।
कभी कुछ नहीं करना भी एक चुनाव है,
और वह भी तुम्हारा है।

क्योंकि अंत में, यह जीवन कोई गंतव्य नहीं,
बल्कि एक अनगिनत विकल्पों की यात्रा है,
जहाँ हर पल तुम्हारी रचना है,
और तुम खुद ही उसका निर्णायक हो।


सिनेमा का साधक



सपनों को कैनवास पर उकेरता हूँ,
दिन की नौकरी में खुद को खोजता हूँ।
रात के सन्नाटों में कहानियाँ बुनता,
हर फ्रेम में अपना दिल रखता हूँ।

नहीं मापता खुद को पैसे से,
कला की परिभाषा मेरे प्रयास से।
फिल्मकार हूँ मैं, इस पहचान से नहीं,
बल्कि उस जुनून से, जो रगों में बहता है कहीं।

हर सुबह काम पर चलता हूँ,
लेकिन रातों में सिनेमा जीता हूँ।
कहते हैं, जो नाम कमाए वही महान,
मैं कहता हूँ, जो दिल लगाए वही सच्चा इंसान।

तो आज भी मैं अपने सपने जिंदा रखूँगा,
काम के बाद भी कहानियों को रचूँगा।
फिल्में मेरी आत्मा हैं, मेरी आवाज़ हैं,
मैं फिल्मकार हूँ, यही मेरी पहचान है।


ताकत और कमजोरी का खेल



ताकतवर दिखे तो सब सर झुकाते,
कमजोर दिखे तो सब मुँह बनाते।
दुनिया का नियम बड़ा सीधा-सादा,
"जिसकी लाठी, उसकी भैंस" का वादा।

तगड़े बंदे जिम में पसीना बहाते,
कमजोर छत पर कपड़े सुखाते।
बाइसेप्स वाले जब गली में आते,
लोग सेल्फी के लिए लाइन लगाते।

कमजोर बेचारे चाय के साथ बिस्किट तोड़ते,
"भाई, तगड़ा कैसे बनूं?" हर कोने में सोचते।
तगड़े की थाली में प्रोटीन का खेल,
कमजोर के पास बस आलू का मेल।

दुनिया को बस बाहरी काया भाती,
अंदर की अच्छाई अक्सर छुप जाती।
पर क्या करें, ये तो बड़ा है कमाल,
"मसल्स दिखे तो दिल भी बड़ा" का सवाल।

कमजोर ने कहा, "भाई, सुन जरा,
हम भी इंसान हैं, दिल से भरा!"
तगड़े ने मुस्कुराकर जवाब दिया,
"पहले पुशअप्स मार, फिर बात किया!"

तो भाई, ये दुनिया बड़ी जज है,
ताकत देखे तो प्यार बढ़े फट से।
पर अंदर की सच्चाई कौन समझाए,
कमजोर का दिल भी कभी न भरमाए।

तो चाहे तगड़े हो या थोड़ा पतले,
मजे करो, खाओ, और रहो मस्त कल्ले।
क्योंकि असली ताकत दिल में है छुपी,
पर हाँ, बाइसेप्स हो तो दुनिया है दबी!


क्षणों की आभा





जब मैं चला जाऊंगा, तुम आएंगे मेरी यादों में,
मुझसे मिलने का अवसर क्यों गवां बैठे हो इस पल में।
क्षमा का स्पर्श अभी दे जाओ, जो बीते कल की गलती हो,
क्योंकि हो सकता है, यह समय फिर से न लौटे।

मृत्यु के बाद मेरी अच्छाई कहोगे जो मेरे पास न पहुंचे,
उससे अच्छा, आज ही प्रेम से कह दो मेरे समीप बैठे।
क्यों देर करो प्रतीक्षा में, इस पल की महिमा समझो,
साथ बिताओ आज ही, मन की शांति में रमण करो।


मानव स्वर्ग की खोज



हमारे पास है धन, शक्ति और विज्ञान,
चिकित्सा का ज्ञान और प्राचीन प्रमाण।
समुदाय में प्रेम, सह-अस्तित्व का भाव,
फिर क्यों अंधकार में डूबा यह स्वभाव?

सर्वत्र है साधन और सामर्थ्य का भंडार,
फिर भी अधूरा क्यों है जीवन का संसार?
विज्ञान ने सुलझाए रोगों के जाल,
फिर क्यों अधूरी है मानव की चाल?

जो ज्ञानी हैं, उनके हाथ में होनी थी डोर,
पर सत्ता संभाली है जिनका चेतना से नहीं जोर।
वे मूढ़, अविवेकी, और अज्ञानी हैं,
न कोई दृष्टि, न उद्देश्य महान हैं।

सर्वे भवन्तु सुखिनः का सपना अधूरा,
धर्म का अर्थ बना राजनीति का फंदा।
जहां होनी थी मुक्ति, वहां बंधन ही बंधन,
भ्रष्ट सोच ने हर दिल में भरा क्रंदन।

पर क्या यह अंत है, या एक नई शुरुआत?
क्या जागेगा मानवता का विराट?
जहां हर जीवात्मा हो आनंदमय,
जहां प्रज्ञा का हो मार्ग प्रशस्तमय।

आओ, चलें उस सत्य की ओर,
जहां करुणा हो हर हृदय का शोर।
जहां योग और ध्यान बने आधार,
जहां हो मानवता का नया संसार।

क्योंकि हमारे भीतर है वह शक्ति अपार,
बस चाहिए धैर्य, और संकल्प का संचार।
जो अंधकार में हैं, उन्हें मार्ग दिखाएं,
मानव स्वर्ग की ओर कदम बढ़ाएं।


चांदनी रात का सौंदर्य


चांदनी रात का सौंदर्य, निखरता आसमान,  
सितारे झिलमिलाते, जैसे सपनों का जहान।  
शीतल पवन का स्पर्श, मन को करता मौन,  
प्रकृति के इस संगीत में, हर दिल हो अनमोल।  

नदिया की लहरों पर, चमके चांद की किरण,  
हर बूंद में बसा है, जैसे प्रेम की सुगंध  
पेड़ों की परछाइयों में, सजीले से छंद,  
हर कोने में गूंजता, प्रकृति का आनंद।  

चिरई की नींद गहरी, फूलों पर ओस का बसेरा,  
धरती ने ओढ़ी चादर, सितारों से घेरा।  
ऐसी रात में मन, हो जाए आत्मविभोर,  
चांदनी के साथ बहें, खुशियों के झरने की ओर।  

प्रतीक्षा का अंत


प्रतीक्षा का अंत

संसार में मेरे जाने के बाद,
तुम आएगे मेरे पास, मन में याद।
तो क्यों न आज ही कुछ पल बिताएं,
मधुर संवाद से हृदय को सजाएं।

क्षमा का सागर बहा दो अभी,
जीवन क्षणिक है, इसकी हो दृष्टि सही।
कह दो वे शब्द जो सुनना चाहूँ,
जिनसे मेरा अंतर्मन सदा चाहूँ।

आज ही संग बैठो, कर लो बातें,
क्योंकि प्रतीक्षा में कभी देर हो जाती है, जीवन में।



जब मैं चला जाऊँगा, आएगा ध्यान तुम्हें,
बुझी सी शमा में जलाओगे प्रेम की लौ।
मेरी स्मृतियों में खोजोगे मुझे,
फिर सोचेगा मन, क्यों न बात की हो थोड़ी और।

जब मैं चला जाऊँगा, मेरी भूलों को माफ करोगे,
उन बातों को क्षमा करोगे, जिनसे मैं अनजान था।
तो क्यों न आज ही प्रेम का सागर बहा दो,
क्षमा का आशीष दे दो, मन को शांत कर दो।

कह दो वो बातें, जिनसे खिल उठे मन,
जिन्हें सुनने की प्रतीक्षा में हूँ मैं आज भी।
प्रेम की उन मधुर लहरों में बहा दो मुझे,
सुन लो मेरे अंतर्मन की पुकार को।

क्यों न आज बैठें कुछ क्षण साथ,
सुख-दुख के अनुभव बाँट लें।
इस जीवन की क्षणभंगुरता में,
मिल जाए कुछ अमरता का बोध, संतोष का साथ।

प्रतीक्षा का अंत करो आज ही,
क्योंकि समय का प्रवाह थमता नहीं।
जीवन की इस अनिश्चित राह पर,
प्रेम से भर लो आज का दिन,
क्योंकि कल की कोई गारंटी नहीं।


मानव स्वर्ग का स्वप्न



हमारे पास धन है, शक्ति अपार,
विज्ञान की समझ, चिकित्सा का आधार।
स्नेह, सामर्थ्य, और समुदाय का सहारा,
फिर भी क्यों है जीवन दुख का कुहासा।

सत्यं शिवं सुंदरं का पाठ है भूला,
आधुनिक मानव ने लोभ का जाल है बुना।
विनाश के मार्ग पर बढ़ते हैं पग-पग,
स्वर्ग धरती पर बना सकते थे, पर ये छल का चक्र।

जिन्हें होना था दीपक, वो बन गए अंधकार,
जिनके हाथों में शासन, वे हैं ज्ञान से लाचार।
न्याय और धर्म का जिनको होना था रखवाला,
वे बन गए अधर्म के प्रतिमान, पथभ्रष्ट करने वाला।

मनुजत्व का मार्ग, करुणा का सहारा,
विज्ञान से सृजन हो, न हो विध्वंस का नारा।
पर जिनकी दृष्टि छोटी, जिनका हृदय संकीर्ण,
वे करते हैं निर्णय, और जगत बनता है पीड़ित।

योग का यह देश, जहाँ था ध्यान का वास,
अब बन चुका है लालच का उपहास।
जिन्हें होना था नायक, वे बने भ्रष्टाचार के साथी,
मानवता कराह रही, जैसे मछली बिना पानी।

संघर्ष का आह्वान है, जागो हे मानव,
अपनी शक्ति को पहचानो, बनो धर्मावतार।
विज्ञान और आध्यात्म का हो मिलन,
तभी होगा सृजन, और मानव स्वर्ग का चिंतन।

जब नेतृत्व में आएंगे ज्ञानी और धीर,
तभी कटेगा दुखों का अंधकार का नीर।
आओ, सत्य और प्रेम का दीप जलाएं,
मानवता को स्वर्ग की ओर ले जाएं।


एक अदृश्य लड़ाई


 बड़े मुद्द्त के बाद अंदर फिर से कुछ मरा है 
जो रोज मरता नहीं, मगर हर दिन नया जन्म लेता है 
उसे मारने के लिए कठिन प्रयास करना पड़ता है 
हर रोज उसे मारने की कोशिश करता हूँ
 पर उसे मार नहीं पाता 

 जितना मैं  उससे लड़ता हूँ 
उतना ही  वो मजबूत होता
 उसके आगे कई  बार मैं घुटने तक देता हूँ 
 इस बार कई दिन की कोश्शि के बाद 
आज उसे मैं मार पाया हूँ 

मगर कल वो फिर से जन्म लेगा 
फिर से वही लड़ाई शुरू होगी 
शायद फर में है जाऊंगा 
मगर हारने के बाद ही  मैं उसे मार पाऊंगा 
ऐसी अपेक्षा मैं खुद से रखता हूँ 

आत्मा और शरीर का अभिन्न संगम



आत्मा और देह, न द्वैत है न भिन्न,
एक ही तत्त्व, अदृश्य और दृश्य का मिलन।
विचार, भावनाएँ, स्पंदन और स्वर,
सब मिलकर गढ़ते हैं जीवन का सफर।

मन के विषाद से तन पर आघात,
यह केवल माया नहीं, सत्य की बात।
संकल्पों की शक्ति, दृढ़ता का संधान,
रचती है भीतर नव ऊर्जा का प्रवाह महान।

क्या नकारात्मक चिंतन से नहीं होती हानि,
रोग-प्रतिकारक शक्ति में आती कमी अपार।
क्या चिंताओं का जाल, उद्देश्य की कमी,
तन को थकावट और मन को लाए नहीं भार।

विपत्ति, वेदना, और अव्यक्त क्रोध का भार,
कसता है वक्षस्थल, आतुर कर देता है।
क्या अनसुलझे विषाद से नहीं मिलता संकट,
पाचन में अवरोध, जीवन में विषाद का अंधकार।

काया का कष्ट, मन को दुख में बाँधता,
पीड़ा की लहरें हृदय में गूंज उठतीं।
दृष्टिकोण में विष, पीड़ा को करता प्रखर,
संपूर्ण अस्तित्व को बनाता पराभूत।

स्मरण रहे, मन, तन, और आत्मा का समागम,
एक अखंड चक्र में एक दूसरे का आलिंगन।
भाव, विचार, और संवेदन का संगम,
निर्मित करता है हमारे अस्तित्व का संग्राम।

अतः एकत्व में देखो, यह नहीं केवल भास,
आत्मा, देह, मन—एक अखंडित प्रकाश।
समरसता में है जीवन का आधार,
अखंड चैतन्य का यह अद्भुत विस्तार।